हमशक्ल की रहस्यमयी कहानी: जब अजनबी ने बदला जीवन

Saurabh Vishwakarma

कल्पना कीजिए कि आप कहीं घूमने गए हों और अचानक आपकी नज़र आपके जैसे दिखने वाले एक अजनबी पर पड़ती है। उसके हाव-भाव, आवाज़, पहनावा और यहां तक कि उसकी कहानी भी एकदम आपकी जैसी हो। सत्यजीत रे की लिखी थ्रिलर कहानी ‘हमशक्ल’ में कुछ ऐसा ही रोमांचक अनुभव मिलता है।

यह कहानी एक ऐसे अजनबी से मिलाने की है जो न केवल दिखने में आपके हमशक्ल होता है, बल्कि उसके बारे में जानकारी जुटाने पर ज्ञात होता है कि वह आपके जीवन के हर पहलू में समानता रखता है, फिर चाहे वो आपके कॉलेज के नंबर हों या आपकी पहली प्रेमिका का नाम। इन रहस्यमयी समानताओं के पीछे क्या साज़िश है, यह जानना अपने आप में एक थ्रिलर है।

इस कहानी को स्टोरीबॉक्स में प्रस्तुत किया है जमशेद क़मर सिद्दीक़ी ने, जो सुनने वालों को अंत तक बांधे रखती है और यह सोचने पर मजबूर कर देती है – कहीं यह साज़िश कहानी को हत्या तक तो नहीं ले जाएगी?